[Last month, on march 19, moon passed by earth at a distance of 356,577 kilometres - the closest pass in last 18 years. This kavita talks about the same super moon event on 19th march, 2011. -Ed]
-स्नेहा
शाम बदल रही है
रात में
चांद खिंचता आ रहा है
धरती की ओर
इस दुर्लभ मिलन को देखने के लिए
बेचैन हूं मैं।
गिनती शुरु हो गयी है
हमे बैरकों के अन्दर
ढकेला जाने लगा है
..३१..३२..३४..३६
सैंतीसवां नम्बर मेरा है
उदास मन लिए
बैरक में बैठकर
सलाखों के पार
आसमान में झांकती हूं
‘हां चांद वहां है
जेल की ऊंची दीवार के पार
पेड़ो के झुण्ड के पीछे‘
मेरी उम्मीद बनती है
सात बजने को है
देर तक आसमान में झांकते रहने के बाद
मेरी नजर घूमती है
टी. वी. के समाचार की ओर
और.. और..
मौके का फ़ायदा उठाकर
पेड़ों के झुण्ड को समेटकर
दीवार पर उचककर
सलाखों को भेदकर
चांद
कूद पड़ा धप्प से
‘आइस-पाइस‘ के खेल की तरह
ठगी रह गयी मैं।
सात बजकर दस मिनट
यह ठीक वही समय था
जब वह धरती के सबसे निकट था
मैं धरती से चांद की मिलन की
बाट जोहती रही
और
चांद मुझसे मिलकर चला गया।