-किसलय
खड़ा है कबीर शापिंग मांल में
बेच रहा है – स्वरचित दोहे।
पूछता है – पंडितो से, मौलवी से
रजवाड़ो से, राजा से -
हुजूर,
किस तरह के दोहे पसन्द है आपको?
माफ़ करना,
अगर ठेस पहुची हो आपको
मेरे द्वारा रचे किसी दोहे से
-अतीत मे।
लेकिन जो बीत गयी
सो बात गयी,
अब समझ लिया है महत्व मैनें
‘कस्टमर सटिस्फ़ैक्शन‘ का।
शिकायत का कोई मौका नही दूंगा,
- बांय वन गेट वन की
स्कीम भी है इस बार।
मेरे शब्दों मे आज भी वही धार है
लेकिन अब वो समर्पित है -
आपके चरणों में!
Advertisement