-स्नेहा
१)
मेरे पास
इतनी समृद्ध और खूबसूरत यादें हैं
कि मैं कहीं भी, कभी भी
अकेली नहीं हो पाती हूं
जैसे कि इस वक्त।
इस वक्त
मैं सलाखों के पीछे नही
बल्कि अपने घर के आंगन में हूं
अम्मा के साथ
पूजा का चौक पूरते हुए
छत पर, बालकनी में
और अपने पढ़ने की मेज पर
दीप सजाते हुए,
भाई के साथ
बहन के घर तक दौड़ लगाते हुए
मिठाई और पकवान खाते हुए
और पति के साथ
इस खूबसूरत रात की साझीदारी करते हुए।
२)
हम कैदियों के अन्दर
अमावस्या का अंधेरा
और उम्मीद का दिया
हर दिन
हर पल
साथ रहता है।
३)
जेल की हर रात
अमावस्या है
पर हमारे अन्दर
एक दिया है
जो हर वक्त जलता रहता है
मद्धम – मद्धम
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